साहिबे निसाब औरत पर खुद उसके नाम से क़ुरबानी वाजिब है,मुसाफिर और नाबालिग पर क़ुर्बानी वाजिब नहीं1⃣

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*🥀 कुर्बानी के मसाइल 🥀*



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*✏️ साहिबे निसाब औरत पर खुद उसके नाम से क़ुरबानी वाजिब है,मुसाफिर और नाबालिग पर क़ुर्बानी वाजिब नहीं*

📚 _(बहारे शरियत,हिस्सा 15,सफ़ह 132)_..

*✏️ हुज़ूर ﷺ फरमाते हैं कि जो इसतेताअत रखने के बावजूद क़ुरबानी न करे तो वो हमारी ईदगाह के क़रीब न आये*

📚 _(बहारे शरियत,हिस्सा 15,सफ़ह 129).._

*✏️ 10,11,12 ज़िल्हज्ज को अल्लाह को क़ुरबानी से ज़्यादा कोई अमल प्यारा नहीं,जानवर का खून ज़मीन पर गिरने से पहले क़ुबुल हो जाता है,और क़ुरबानी करने वाले को जानवर के हर बाल के बदले 1 नेकी मिलती है*

📚 _(बहारे शरियत,हिस्सा 15,सफ़ह)_..

*✏️ जिसपर हर साल क़ुरबानी वाजिब है उसे हर साल अपने नाम से क़ुरबानी करनी होगी,कुछ लोग 1 साल अपने नाम से क़ुरबानी करते हैं दूसरे साल अपने बीवी बच्चों के नाम से क़ुरबानी करते हैं,ये नाजायज़ है*

*📚 _(अनवारुल हदीस,सफ़ह 363)_*

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*🏁 मसलके आला हजरत 🔴*

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