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जून, 2025 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

क़ुर्बानी के जानवर

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 क़ुर्बानी के जानवर 🥀*  *ज़बह से पहले क़ुर्बानी के जानवर से मनफ़अत (फ़ायदा) हासिल करना मना है, मसाइल ⤵️* ✏️ ज़बह से पहले क़ुर्बानी के जानवर के बाल अपने किसी काम के लिए काट लेना या उसका दूध दुहना मकरूह व ममनूअ है और क़ुर्बानी के जानवर पर सवार होना या उस पर कोई चीज़ लादना या उसको उज़रत पर देना ग़र्ज़ उससे मुनाफ़ा हासिल करना मना है अगर उसने ऊन काट ली या दूध दुह लिया तो उसे सदक़ा कर दे और उजरत पर जानवर को दिया है तो उजरत को सदक़ा करे और अगर ख़ुद सवार हुआ या उस पर कोई चीज़ लादी तो उसकी वजह से जानवर में जो कुछ कमी आई उतनी मिक़दार में सदक़ा करे। ✏️ जानवर दूध वाला है तो उसके थन पर ठंडा पानी छिड़के कि दूध ख़ुस्क हो जाए अगर उससे काम न चले तो जानवर को दुह कर दूध सदक़ा करे। ✏️ जानवर ज़बह हो गया तो अब उसके बाल को अपने काम के लिए काट सकता है और अगर उसके थन में दूध है तो दुह सकता है कि जो मक़सूद था वो पूरा हो गया अब ये उसकी मिल्क है अपने सर्फ़ में ला सकता है। 📚 बहार ए शरीअत, जिल्द 3, हिस्सा 15, सफ़ा 345 जारी है..... 👑👑👑👑👑👑👑👑👑👑 *🏁 मसलके आला हजरत 🔴* https://cha...

YAUM E ARAFAH KA ROZA

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 YAUM E ARAFAH KA ROZA 🥀* ♻HADEES:- Hazrat e Abu Qatadah رضى الله تعالى عنه se riwayat hai ke RasoolAllah صلى الله تعالى عليه وسلم farmate hain mujhe Allah تعالى par gumaan hai ke arfah ka roza 1 saal qabl aur 1 saal baa'd ke gunaah mita deta hai. 📒(Muslim / Abu daaud / Tirmzi) ♻HADEES:- Ummul Momineen Siddiqa رضى الله تعالى عنها se riwayat hai RasoolAllah صلى الله تعالى عليه وسلم arfah ke roza ko 1000 din ke barabar batate. 📒(Baihaqi / Tibrani)  ♻HADEES:- Hazrat e Abu Hurairah رضى الله تعالى عنه se riwayat hai keh Huzoor صلى الله تعالى عليه وسلم ne arfah ke din (Arafaat) me rozah rakhne se mana farmaya. 📒(Abu daaud / Nasai)  🔹MASLAH:- Hajj karne wale par jo arafaat men hai use arfah ke din ka rozah makrooh hai. 📒(Bahar e shari'at) *🍁ARAFAH O EIDAIN WAGAIRAH KI RAATO MEN SHAB BEDAARI🍁* ♻HADEES:- Hazrat e Abu Umamah رضى الله تعالى عنه se riwayat hai ke RasoolAllah صلى الله تعالى عليه وسلم farmate hain jo eidain ki raato me qiyaam (ibadat) kare us...

वहाबी देवबंदी का ज़बीहा मुर्दार क्यों है और किताबी का ज़बीहा हलाल क्यों है जबके दोनों काफ़िर बददीन हैं

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 वहाबी देवबंदी का ज़बीहा मुर्दार क्यों है और किताबी का ज़बीहा हलाल क्यों है जबके दोनों काफ़िर बददीन हैं 🥀* काफ़िर की 2, क़िस्मैं हैं असली और मुर्तद. असली काफ़िर वो है जो शुरू से काफ़िर हो और कल्मा ए इस्लाम का मुन्किर हो. फिर असली काफ़िर की भी 2. क़िस्मैं हैं. मुनाफिक़ और मुजाहिर. मुनाफिक़ वो काफ़िर है के बज़ाहिर कल्मा पढ़ता हो और दिल से इन्कार करता हो. और मुजाहिर वो काफ़िर है के एलानया कल्मा ए इस्लाम का इन्कार करता हो. इसकी 4. क़िस्में हैं नं.1, दहरयाह नं.2, मुशरिक नं.3, मजूसी इन सबका ज़बीहा मुर्दार है और नं.4, किताबी ये भी अगरचे कल्मा ए इस्लाम का एलानया इन्कार करता है मगर इसका ज़बीहा हलाल है इस वजह से के अल्लाह अज़्ज़ व जल्ल ने फ़रमाया➡ و طعا م ا لزیں ا اُتو ا ا لكتب حل لکم،  और हज़रत इब्ने अब्बास रज़ीअल्लाहु तआला अन्हुमा ने इस आयत ए करीमा की तफ्सीर में फ़रमाया➡  تعا مہم ذبيحت ہم तो आयत ए मुबारक का खुलासा ये हुआ के किताबियों का ज़बीहा तुम्हारे लिए हलाल है के ज़िबह करने वाले का किसी आसमानी किताब पर ईमान रखना शर्त है लिहाज़ा किताबी ने अगर मुसलमान के साम...

Qurbani Ka Janwar Kharid’te Waqt Kin Baato Ka Khayal Rakhe

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 Qurbani Ka Janwar Kharid’te Waqt Kin Baato Ka Khayal Rakhe 🥀* » Qurbani Ka Jaanwar Kharid Te Waqt In 4 Chizo Aur Aankh Kaan Ka Khayal Rakhe !! 1) Mahfum-e-Hadees: Bara Bin Aazib (Razi’Allahu Anhu) Se Riwayat Hai Ke, Rasool’Allah (Sallallahu Alaihay Wasallam) Se Poocha Gaya, “Kis Jaanwar Ki Qurbani Se Bachna Chaehai?” *Aap Sallallahu Alaihay Wasallam Ne Fermaya – “4 Qism Ke Jaawaro Se Bachna Chahiye, 1) Langra: Jiska Langrapan Zahir Ho, 2) Bhainga: Jiska Bhaingapan Zahir Ho, 3) Beemar: Jiski Beemari Wazeh Ho, Aur 4) Kamzor: Jiski Haddiyo Me Gooda Na Ho.” – (Musnad Ahmed, 301/4) 2) Mahfum-e-Hadees: Huzaifa (Razi’Allahu Anhu) Se Riwayat Hai Ke, Rasool’Allah (Sallallahu Alaihay Wasallam) Ne Humain Hukm Diya Ke – “Hum (Qurbani Ka Jaanwar) Kharidtey Waqt Iski Aankhain Aur Kaan Achi Terha Daikh Lain.” – (Ibn Khuzaima, Hadith no. 2914, 2915 Mustadrik Hakim, Hadith no. 467/1, 220/4) *Note: Iska Khas Khayal Rakhe Hum Tehqeeq Tou Karte Hee Hai Par Shayad Iss Lihaz Se Ke ...

Buzurgo Ke Naam Se Qurbani

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 Buzurgo Ke Naam Se Qurbani 🥀* *Sawal* ✏️ kya farmate hai ulama e din masala zaid Ne Walid ke maujudgi men jab ke beta khud malik e nisab hai baap se koi matlab nahi rahta or zaid ka kahna hai ki gaus e paak ke naam se qurbani karne se behtar hai ke khud apne naam se karlen kiya ye jumla durust hai Aap hamari rahnumai farmayen *Jawab* ✏️(1 ) Zaid agar sahibe nisab hai to zaid pe khud ki taraf se qurbani karna wajib hai Agar khud ki taraf se qurbani ke dino min khud ke zimma se wajib na ada diya or qurbani ke din nikal gaye to zaid gunah gar huwa ab zaid ak bakari sadqa min de Ya us ki jo raqam hoti hai wah de tab qurbani ka wajub Sar se utre ga Agar sadqa na diya to wajib Sar pe barqarar raha Kisi buzur ki taraf se qurbani karne se bahtar hai ke pahle khud ke upar jo wajib hai use ada kare or usat hai to phir kisi buzurg ki taraf se qurbani kare Kisi ke taraf se zaid pe qurbani karna wajib nahi hai balke mustahab w sawab hai.  ✏️ Is tarah samjha jaye jaise ...

क़ुर्बानी के अहकाम

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 क़ुर्बानी के अहकाम 🥀* ✏️उमुरे इस्लाम मे कुछ फराईज़ व वाजिबात हैं जिनका बजा लाना लाज़िम व जरूरी है इन उमूर में से क़ुर्बानी भी है जो वाजिब है जिसके पास अय्यामें क़ुरबानी मे मिक़दारे निसाब माल हो ख्वाह वह माल रुपये व नक़दी सोना चाँदी या काश्त वगैराह की शक्ल में हो उन पर क़ुरबानी वाजिब है अल्लाह तआला ने नजदीक क़ुरबानी के दिनों में जानवर जा खून बहाने अमल बहुत ज्यादा महबुब व पसन्दीदा है बारगाहे खुदाबन्दी में अगरचे क़ुरबानी का गोश्त पोस्त नही पहुँचता मगर उस से बन्दे को जो तक्वा हासिल होता है वह तक्वा पहुँचता है बन्दे की यही सबसे बड़ी सआदत व फ़ीरोज़ बख्ती है कि उसका कोई नेक काम खुदा की बारगाह में पहुँचे और वह कुबूल हो जाए । ✏️हदीस में है ज़ैद बिन अकरम रज़ि अल्लाहु तआला अन्हु कहते हैं रसूलल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से पूछा या रसूलल्लाह यह क़ुरबानियाँ किया हैं फामाया तुम्हारे बाप हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की सुन्नत पूछा उसमें हमको क्या मिलेगा फरमाया उसके हर बाल के बराबर नेकी लोगो ने अर्ज़ किया और उनके बारे में क्या इरशाद फ़रमाया उसके भी हर बाल के बराबर नेकी मिलेगी बाल से इशारा ब...

तकबीरे तशरीक़

*तकबीरे तशरीक़*  अय्यामे तशरीक़ में ही यानी 9 नौमी ज़िलहिज्जा की फ़जर से ले कर 13 तेरहवीं ज़िलहिज्जा के असर तक हर फ़र्ज़ पंजगाना नमाज़ बाजमाअत के बाद जो तकबीर कही जाती है उसे ही तकबीरे तशरीक़ कहा जाता है,  👉 तकबीरे तशरीक़ हर फ़र्ज़ नमाज़ पंजगाना बा-जमाअत के बाद 1 बार पढ़ना वाजिब और 3 बार पढ़ना अफ़ज़ल है 👉 तकबीरे तशरीक़ बाआवाज़ बुलंद पढ़ना वाजिब है 👉 तकबीरे तशरीक़ सलाम फेरने के तुरंत बाद कहना होता है 👉 अगर ताख़ीर किया जैसे मस्जिद से बाहर चला गया, जान कर वुज़ू तोड़ दिया, तो अब इससे तकबीर साकित हो गयी 👉 औरतों पर तकबीरे तशरीक़ वाजिब नही 👉 अकेले नमाज़ पढ़ने वालों पर तकबीर नही है, हां कह ले कियूंकि कि साहेबैन के नज़दीक उस पर भी वाजिब है 👉 नफ़्ल, वाजिब, सुन्नत के बाद तकबीरे तशरीक़ नही, *📚 बहारे शरीअ़त, हिस्सा 04, सफ़ह 61-62* *तकबीरे तशरीक़* *اللَّهُ أَكْبَرُ اللَّهُ أَكْبَرُ لَا إلَهَ إلَّا اللَّهُ وَاَللَّهُ أَكْبَرُ اللَّهُ أَكْبَرُ وَلِلَّهِ الْحَمْد*

ईदुल अज़्हा की सुन्नतें

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 ईदुल अज़्हा की सुन्नतें 🥀*  *1)👉 09 ज़िल हज्जा की फ़ज्र से 13 ज़िल हज्जा की अस्र तक तकबीरात कहना ।* *📚 [बैहक़ी: 3/314]* *2)👉 तकबीरात: अल्लाहु अकबर अल्लाहु अकबर ला इलाहा इल्लल्लाह, वल्लाहु अकबर अल्लाहु अकबर वलिल्लाहिल हम्द* *📚 [इब़्न अबी शैबा: 5652]* *3)👉 गुस्ल करना ।* *📚 [बैहक़ी: 3/278]* *4)👉 अच्छा कपड़ा पहनना ।* *📚 [बैहक़ी: 3/281]* *5)👉 खुशबू लगाना और मिसवाक करना ।* *📚 [इब्न माजह: 1098]* *6)👉 नमाज़ ए ईदुल अज़्हा से पहले कुछ न खाना ।* *📚 [तिर्मिज़ी: 542]* *7)👉 नमाज़ ए ईदुल अज़्हा के लिये ईद गाह जाना ।* *📚 [बुखारी: 956]* *8)👉 ईद गाह पैदल जाना ।* *📚 [तिर्मिज़ी: 530]* *9)👉 अपने दोस्तों और क़रीब वालों के साथ ईद गाह जाना ।* *📚 [इब़्न ख़ुज़ैमा: 1431]* *10)👉 घर से ईद गाह जाने तक तकबीरात कहना ।* *📚 [बैहक़ी: 3/669]* *11)👉 नमाज़ ए ईदुल अज़्हा के लिये एक रास्ते से जाना और दुसरे रास्ते से वापीस आना ।* *📚 [बुखारी: 986]* *13)👉 नमाज़ ए ईदुल अज़्हा के बाद क़ुर्बानी करना ।* *📚 [बुखारी: 5546]* *14)👉 नमाज़ ए ईदुल अज़्हा के बाद क़ुर्बानी का गोश्त खाना ।* ?...

वहाबी देवबन्दी का ज़बीहा हराम है

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 वहाबी देवबन्दी का ज़बीहा हराम है 🥀* ♦️एक मशहूर आलिम-ए-दीन की तरफ मनसूब एक वीडियो सोशल मीडिया पर गश्त लगा रहा है। ऐसे विडियोज़ की निस्बत की सदाक़त जब तक वाज़ेह न हो, तब तक मनसूब इलैह का नाम लेना भी मुनासिब नहीं।  विडीयों का खु़लासा ये है के एक साईल ने सवाल किया की वहाबी का ज़बीहा जाईज़ है या नहीं जवाब दिया गया की सिर्फ काफिर का ज़बीहा हराम है। गुमराह का ज़बीहा हराम नही। चूके वहाबिया में से चार शख़्स और एक का़दयानी यानी कुल पांच लोगों पर हुक्म ए कुफ्र है, लिहाज़ा इन का ज़बीहा हराम होंगा। बाकी जिस वहाबी के कुफ्र का हमे इल्म नहीं, हम उस को गुमराह मानेंगे और उसका ज़बीहा जाईज़ होगा। वाज़ेह रहे के बर्रेसगी़र में फिरक़ा-ए-वहाबिया के दो गिरोह है। मुक़ल्लिद वहाबीया को देवबंदी कहा जाता हैं और गै़र मुक़ल्लिद वहाबिया को सल्फी और अहले हदीस कहा जाता हैं। जिस जमाअत के बुनयादी अक़ाइद में कुफ्र पाया जाता हो, उस जमाअत का जमाअती हुक्म वही होगा जो काफ़िर जमाअ़तो का जमाअती हुक्म होता है। जमाअती हुक्म उस जमाअ़त के तमाम अफ़राद पर नाफिज़ होता है। देवबंदी एक मुर्तद जमाअत का नाम है,...

क़ुर्बानी की दुआ

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 क़ुर्बानी की दुआ 🥀* *✏️ क़ुर्बानी कैसे करें ये भी समझ लीजिये जानवर को खाना पानी दिखाते रहिये और छुरी वगैरह पहले से ही तेज़ करके रखें,एक के सामने दूसरे जानवर को हरगिज़ ज़बह ना करें, जब जानवर को ज़बह करने का इरादा हो जाए तो जिसको ज़बह करना हो वो पहले से ही क़ुर्बानी की दुआ पढ़ले* *اِنِّى وَجَّهْتُ وَجْهِيَ لِلَّذِيْ فَطَرَ السَّمَوَاتِ وَالأَرْضَ حَنِيْفًا وَّمَا اَنَا مِنَ الْمُشْرِكِيْنَ اِنَّ صَلاَتِيْ وَنُسُكِيْ وَمَحْيَايَ وَمَمَاتِيْ للهِ رَبِّ الْعالَمِيْنَ لاَ شَرِيْكَ لَه وَبِذَلِكَ اُمِرْتَ وَاَنَا مِنَ الْمُسْلِمِيْنَ اَللَّهُمَّ مِنْكَ وَلَكَ* ✏️ फिर जानवर को बायें पहलु पर इस तरह लिटा दें कि उसका मुंह क़िब्ले की जानिब हो और अपना दायां पैर उसके पहलु पर रखकर फौरन जल्दी से *बिस्मिल्लाह अल्लाहु अकबर* कहकर ज़बह कर दें, फिर उसके बाद ये दुआ पढ़ें *اَللّهُمَّ تَقَبَّلْهُ مِنِّي كَمَاْ تَقَبَّلْتَ مِنْ حَبِيْبِكَ مُحَمَّدٍ وَّخَلِيْلِكَ اِبْرَاهِيْمَ عَلَيهِمَا الصَّلوةُ وَالسَّلام* ✏️अगर क़ुर्बानी अपनी तरफ से है तो यही अलफाज़ अदा करें और अगर दूसरे की तरफ से ज़बह किया है तो...

ग़ैरों की दावत करना या उनकी दावत में खाने जाना

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 ग़ैरों की दावत करना या उनकी दावत में खाने जाना 🥀* *✏️ वहाबी, देवबंदी, अहले हदीस, (ग़ैर मुस्लिम) की दावत में जाना* देखें जैसा कि हमारे अकाबिर ओलमाये कराम शरीअत का हुक्म बयान फ़रमाते हैं और बताते हैं कि मुसलमानों को ग़ैरों से सिर्फ दुनियावी तअल्लुक़ात होने चाहिए जो कि सिर्फ दुनियावी ज़रूरत के मद्दे नज़र हों, बाकी उनसे इतना मेल जोल की उनके दावत में जाए, हुज़ूर सदरुश्शरियह عليه الرحمة इरशाद फ़रमाते हैं कि मुसलमानों को मुतलक़न काफ़िरों से इज्तिनाब चाहिए ना कि इतना मेल जोल की दावत में शिरकत हो क्यूंकि ये नजाएज़ है, *वहाबी, देवबंदी, अहले हदीस, (ग़ैर मुस्लिम) की दावत करना* ठीक उसी तरह से ग़ैरों की दावत करने पर हुक्म बयान फ़रमाते हैं कि कुफ़्फ़ार से मेल जोल सिर्फ़ दुनियावी ज़रूरत जैसे तिजारती या नौकरी के मामलात तक हों ना कि इतना कि उनकी दावत की जाए और दस्तरख़्वान एक किया जाए ये जाएज़ नही, लिहाज़ा हमें चाहिए कि हत्तल इमकान कोशिश ये करें कि ग़ैरों की दावत में जाने से बचें और उनकी दावत करने से भी बचें क्यूंकि ये जाएज़ व दुरुस्त नही, हां आज के वक़्त में तिजारती और नौकरी के हालात में अक्सर ऐसे वक्त...

Qurbani Ki Khaal Dafn karna

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 Qurbani Ki Khaal Dafn karna 🥀* *👉 Qurbani Ki Khal Ko Dafn karna jaiz nahi ye maal Ko Barbad karna he.* Jaisa Ki Saiyedi Aala Hazrat Alahir Rahmato Ridwan Taherir Farmate he, Khal Dafn Karna Haram he ke iza'ate Maal he. *📚 AL-MALFOOZ, J-3, S-14* Huzur Muhaddise Kabeer Hazrat Allama Ziya Ul Mustafa Sahab Qibla 2 Aug 2019 Baroz Jumaa ko Amjadi Razvi Jame'a Masjid me khitab karte huye Farmate he Qurbani Ki Khal ko dafn kar dena ye durust nahi he is liye ki us janwar par Allah Ta'ala ki milkiyat he. Lekin banda us janwar ke gosht ko khaye or khal ko apne kaam me istemal kare or agar us khal ko bech diya to uski qimat ko sadqa karna zaroori he. Lekin us janwar ke koi bhi juz ko zaaye karna durust nahi. Lihaza khal bhi ek juz he to usko bhi zaaye karna durust nahi he. Or khal ko dafn karne ke bare me na koi daleel he or na Qura'an w hadis se he or na hi is par koi juzya he. Lihaza khal ko dafn na kare balki usko apne kaam me istemal kare ya bech kar...

QURBANI KARNE KA AMAL

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 QURBANI KARNE KA AMAL 🥀* *SAWAL* JIN MARD AURAT KE ZIMME QURBANI HAI WO CHAND RAAT SE PEHLE UNKE LIYE KONSA AMAL HAI JO KARNA HAI , BAAL NAAKHUN KA AUR JIN KE ZIMME NAHI UNKE LIYE KYA HUKM *JAWAB* *BAAL O NAAKHUN KATWANE KA HUKM* ✏️HADEES ummul mumineen umm e salama رضى الله تعالى عنها se riwayat hai keh huzur صلى الله تعالى عليه وسلم ne farmaya jis ne zilhijjah ka chaand dekh liya aur uska iraadah Qurbaani ka hai to jab tak Qurbaani na kar le baal o naakhuno se na le yani na tarashwaye  📚(Muslim / tirmizi / nasai) ✏️MASLAH::: jis ko Qurbaani karne ka iradah ho us ke liye mustahab hai keh zilhijjah ka chaand dekhne ke ba'd naakhun baal wagairah na kaate  ✏️MASLAH::: agar kisi shakhs ne (31) din se kisi uzr ke sabab, khwah bila uzr naakhun na tarashe hon, khat banwaya na ho keh chaand zilhijjah ho gaya to agarcheh Qurbaani ka iradah rakhta ho is mustahab par amal nahin kar sakta keh ab daswen tak rakhega to naakhun o khat banwaye huye ektaaliswan (41)...

ईद सिर्फ गोश्त खोरी का दिन नही है

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 ईद सिर्फ गोश्त खोरी का दिन नही है 🥀* *हजरत बरा बिन अज़िब रज़ियल्लाहु अन्हु फरमाते है कि इनके मामु हजरत बुरेदा बिन नियार रज़ियल्लाहु अन्हु ने हुजुर नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैह व सल्लम के जानवर ज़िब्हा करने से पहले कुरबानी कर दी और फरमाने लगे या रसूल्ल्लाहा ये वो दिन है जिसमे गोश्त कि ख्वाहीश करना मकरुह है, और मेने अपने बच्चो और हमसांयो और घरवालो के लिये जल्दी कुरबानी कर दी है तो नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैह व सल्लम ने फरमाया कि अपनी कुरबानी दोहराओ तो हजरत बुरेदाह ने कहा या रसूल्ल्लाहा मेने पास एक कम उम्र कि दुध पिती एक बकरी है जिसमे दौ बकरीयो के बराबर गोश्त है, तो आप नबी ए करीम ने फरमाया ये तुम्हारी दौनो कुरबानी से बेहतर है और तुम्हारे बाद किसी के लिये एक साल से उम्र कि बकरी करना काफी नही है* *इस हदीस से पता चला है खास इस दिन को गोश्त कि तलब और गोश्त खाने कि निय्यत से कुरबानी करना मकरुह है बल्कि मकसद कुरबानी का ये होना चाहीये कि इससे अल्लाह का कुर्ब हासिल हो, और गरीबो मिस्किनो और घरवालो पर दस्तरख्वान वसी किया जाए उनको कुरबानी मे से गोश्त तकसिम किया जाए इसिलिये नबी...

क़ुर्बानी के अहकाम व मसाइल

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 क़ुर्बानी के अहकाम व मसाइल 🥀*      *उम्मत की तरफ से हुज़ूर की क़ुरबानी:* 📖हदीस में है हुज़ूरे अक़दस सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने एक दुंबे कि जबह में फ़रमाया बिस्मिल्लाह अल्लाहु अकबर इलाही यह मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि व सल्लम और उनके अहले बैत की तरफ से है दूसरे की जबह में फ़रमाया बिस्मिल्लाह अल्लाहु अकबर यह उसकी तरफ से है जिसने मेरी उम्मत से क़ुरबानी न की मुसलमानों अपने नबी रऊफ व रहीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की रहमत देखो  *📖हदीस ::-* में इरशाद है फरबा व ताजा क़ुरबानियाँ करो कि वह पुल सिरात पर तुम्हारी सवारियां होंगी हुज़ूरे अनवर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम मालूम था कि मेरी उम्मत में करोड़ों वह होंगे जो क़ुरबानी से आजिजा होंगे या उन पर वाजिब न होने के सबब क़ुरबानी न करेने हुज़ूर ने न चाहा कि वह सिरात पर बेसवारी के रह जाएं उनकी तरफ से खुद क़ुरबानी फरमा दी कि अगर वह अपनी जान भी कुरबान करते तो उनकी दस्ते मुबारक़ की फजीलत को न पहुँचते सल्लल्लाहु तआला अलैहि अला आलेही व सहबेही व बारिक वसल्लम। ♻इस बारे में आला हजरत इमाम अहमद रज़ा का अमल मुलाहिजा हो खुद...

8 और 9 ज़िलहिज्जा के रोज़े की फज़ीलत

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 8 और 9 ज़िलहिज्जा के रोज़े की फज़ीलत 🥀* ✏️नबीए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया यौमे अरफा (9 ज़िलहिज्जा) का रोज़ा 2 साल के रोज़ों के बराबर हैं। *📚मुकाशफतुल क़ुलूब, सफा-548* ✏️नबीए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया जिसने यौमे तरवियाह (8 ज़िलहिज्जा) का रोज़ा रखा अल्लाह तआला उसे हज़रत सय्यदना अय्युब अलैहिस्सलाम के मसाइब पर सब्र करने के बराबर सवाब अता फरमाता है और जिसने यौमे अरफा (9 ज़िलहिज्जा) का रोज़ा रखा अल्लाह तआला उसे हज़रत सय्यदना ईसा अलैहिस्सलाम के बराबर सवाब अता फरमाता है। *📚मुकाशफतुल क़ुलूब, सफा-549* ✏️रसूले आज़म सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया यौमे अरफा (9 ज़िलहिज्जा) का रोज़ा एक साल गुजश्ता और एक साल आईन्दा साल के गुनाहों का कफ्फारा होता है। (यानि अल्लाह करीम इस रोज़े की बरकत से एक साल पहले के और एक साल बाद के गुनाह माफ फरमा देता है।   *📚मुकाशफतुल क़ुलूब, सफा-549* ```✏️तस्बीहे तशरीक़~``` *🕋अल्लाहु अकबर अल्लाहु अकबर, लाइलाहा इल्लल्लाहु वल्लाहु अकबर अल्लाहु अकबर व लिल्लाहिल हम्द।* 👉🏻9 ज़िलहिज्जा की नमाज़े फज्र से 13 ज़िलहिज्जा की नम...

मसाइले क़ुर्बानी-12*🧜🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹