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फज़ाइले क़ुर्बानी

*मसाइले क़ुर्बानी-12* *मसअला* - क़ुर्बानी की खाल उसका गोश्त उसका सर या पैर कोई भी चीज़ काटने वाले को उसकी उजरत के बदले नहीं दे सकते कि ये भी बेचना ही हुआ हां तोहफतन दे सकते हैं जैसे कि और मुसलमान को देते हैं मगर खाल नहीं दे सकते 📕 बहारे शरीयत,हिस्सा 15,सफह 145 *मसअला* - क़ुर्बानी की खाल को अपने लिए बेचना मना है और हर दीनी व मिल्ली काम या मदारिस में सदक़ा की जा सकती है या बेचकर उसकी कीमत भी दे सकता है 📕 बहारे शरीयत,हिस्सा 15,सफह 144

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*मसाइले क़ुर्बानी-11* *मसअला* - क़ुर्बानी के वक़्त जानवर उछला कूदा जिससे उसे चोट लग गई ऐबदार हो गया तो ये ऐब मायने नहीं रखता क़ुर्बानी हो जायेगी 📕 बहारे शरीयत,हिस्सा 15,सफह 141 *मसअला* - क़ुर्बानी का जानवर खो गया या मर गया तो लाज़िम है कि दूसरा जानवर क़ुर्बानी करे और अगर दूसरा जानवर लाया और गुम हुआ जानवर मिल गया तो जो मंहगा हो वो क़ुर्बानी करे और अगर सस्ता वाला क़ुर्बानी करेगा तो जितनी कीमत का फर्क आयेगा उतनी कीमत सदक़ा करे,दोनो की भी क़ुर्बानी कर सकता है 📕 बहारे शरीयत,हिस्सा 15,सफह142 *मसअला* - अगर 2 लोग साथ में छूरी चला रहे हैं तो ज़बह के वक़्त दोनों को बिस्मिल्लाह पढ़ना वाजिब है अगर एक ने भी तर्क किया तो जानवर हराम है 📕 बहारे शरीयत,हिस्सा 15,सफह 149 *मसअला* - एक ही आदमी कई जानवर को अपने नाम से क़ुर्बानी करना चाहता है तो कर सकता है एक वाजिब होगी बाकी सब नफ्ल,और बड़ा जानवर एक नाम से ज़बह कर दिया तो एक ही माना जायेगा ना कि 7वां हिस्सा 📕 बहारे शरीयत,हिस्सा 15,सफह 150

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*मसाइले क़ुर्बानी-10* *मसअला* - औरत और समझदार बच्चे का ज़बीहा हलाल है,पागल नासमझ बच्चा और मुर्तद का ज़बीहा हराम है 📕 फतावा मुस्तफविया,सफह 434 *मसअला* - गले में 4 रग होती है 1.हलक़ूम जिससे सांस आती है 2.मिर्री जिससे खाना पानी उतरता है और दो रगें खून की रवानी के लिए होती हैं जिन्हे जबीन कहा जाता है,ज़बह में इन चारों में से 3 का कट जाना काफी है और अगर सबका अक्सर हिस्सा कट गया तब भी जानवर हलाल होगा लेकिन अगर सबका आधा हिस्सा कटा और आधा रह गया तो हलाल नहीं होगा 📕 बहारे शरीयत,हिस्सा 15,सफह 116 *मसअला* - जो बकरे खस्सी नहीं किये जाते वो अक्सर अपना ही पेशाब पीना शुरू कर देते हैं या कुछ जानवर गाय भैंस बकरा बकरी मुर्गा वगैरह नजासत खाने लग जायें तो उनके गोश्त में बदबू आ जाती है ऐसो को जल्लाला कहते हैं,इसके लिए उन्हें कुछ दिन बांधकर रखा जाये ताकि वो नजासत ना खाने पायें फिर उन्हें ज़बह करें अगर बदबू ना हो तो खायें और अगर बू है तो मना है 📕 बहारे शरीयत,हिस्सा 15,सफह 127

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       *अरफा व ईदुल अज़्हा-9* *हदीस* - हुज़ूर सल्लललाहु तआला अलैहि वसल्लम फरमाते हैं कि अरफा यानि 9वीं ज़िल्हज्ज का रोज़ा अगले व पिछले 1 साल के गुनाहों का कफ्फारा है 📕 मुस्लिम,जिल्द 1,सफह 819 *ⓩ आज इलाहाबाद में खत्मे सहर 4:18 पर है तो अगर कोई रोज़ा रखना चाहे तो इससे पहले ही सहरी खत्म कर ले,एक और बात चुंकि ये रोज़ा नफ्ल है तो अगर किसी का कभी का कोई भी रोज़ा रमज़ान का बाकी हो तो बजाये नफ्ल नियत करने के वो रमज़ान के क़ज़ा की नियत करले तो उसका एक रोज़ा अदा भी हो जायेगा और अरफे में रोज़ा रखने की भी फज़ीलत पायेगा इन शा अल्लाह तआला* *आमाल* - अरफे की रात यानि आज 2 रकात नमाज़ नफ्ल इस तरह पढ़ें कि पहली में सूरह फातिहा के बाद 100 बार आयतल कुर्सी और दूसरी में 100 बार सूरह इखलास,तो क़यामत के दिन इस नमाज़ की बरकत से मौला तआला उसको और उसके घर व अज़ीज़ों से 70 लोगों की बख्शिश फरमायेगा  📕 बारह माह के फज़ायल,सफह 484 *तकबीरे तशरीक़* - 9वीं ज़िल हज्ज की फज्र से लेकर 13वीं की अस्र तक बा जमाअत नमाज़ पढ़ने वालों को हर फर्ज़ नमाज़ के बाद तकबीरे तशरीक़ 1 बार पढ़ना वाजिब और 3 बार कहना मुस्तहब है,जिनकी कुछ रक...

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*बेमिसाल क़ुर्बानी-8* * हज़रत इस्माईल अलैहिस्सलाम जब तक पैदा नहीं हुए थे तो हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम औलाद के लिए दुआ किया करते थे जब उनकी दुआ क़ुबूल हुई तो मौला फरमाता है कि "हमने उसे खुशखबरी सुनाई एक बुर्दबार लड़के की" चुंकि मौला ने उन्हें सब्र वाला फरमाया था सो उसकी मिसाल भी पेश करनी थी और दुनिया को दिखाना भी मक़सूद था,सो हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम को ज़िल्हज्ज की 8,9,10 तारीख को लगातार ख्वाब में आपके बेटे की क़ुर्बानी करने का हुक्म दिया गया,चुंकि ये हुक्म ख्वाब में देखा था तो 8 को पूरा दिन सोचने में गुज़र गया तो इस दिन को यौमुल तरविया यानि सोच विचार का दिन कहा गया फिर 9 को ख्वाब देखा तो पहचान लिया कि ये सच्चा ख्वाब है तो इसे यौमुल अरफा यानि पहचानने का दिन फिर 10 को इरादा कर लिया क़ुर्बानी पेश करने का इस लिए इस दिन को यौमुन नहर यानि क़ुर्बानी का दिन कहा गया 📕 तफसीरे नईमी,जिल्द 2,सफह 296  * क़ुर्बानी के वक़्त हज़रत इस्माईल अलैहिस्सलाम की उम्र कितनी थी इसमें 2 क़ौल है बाज़ ने 7 साल कही और बाज़ ने 13 मगर 13 ही राजेह है,10वीं ज़िल्हज्ज को आप अपने बेटे को लेकर मिना की जानिब निकल पड़े पहले तो शैत...

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*इस्लामी ज़बीहा*            *6* *ⓩ गोश्त वो लज़ीज़ खाना है कि शायद दुनिया में बहुत कम लोग ही होंगे जो इससे ना आशना हैं तक़रीबन हर मज़हब व हर क़ौम में ही गोश्त खाया जाता है,जानवर को मार कर खाने का अलग अलग तरीका अलग अलग कौम में रायज है मगर जानवर को ज़बह करने की जो तरक़ीब इस्लाम ने बताई उसमें कई हिकमतें हैं,मुलाहज़ा करें* *गिलोटिन* - ज़्यादातर लोगों के यहां जानवर ज़बह करने का ये तरीक़ा है कि जानवर की गर्दन पर पीछे से छुरा चापड़ या आरे से ऐसा वार करते हैं कि जिससे उसका पूरा सर धड़ से अलग हो जाता है इसे झटके का गोश्त कहते हैं,इसकी साईंसी हैसियत ये है कि झटका करने में उसकी रीढ़ की हड्डी कट जाने के बाईस जानवर का दिमाग फौरन जिस्म से रिश्ता तोड़ देता है और पूरा जिस्म बे हरकत हो जाता है,ज़ख्म से सिर्फ उतना ही खून निकलता है जितना कि उसके आस पास मौजूद होता है बाकी का खून गोश्त में जज़्ब होने लगता है जिससे कि गोश्त बदरंग बे मज़ा और बदबूदार हो जाता है,अक्सर मशीनों से भी जानवर इसी तरह ज़बह किये जाते हैं इसे गिलोटिन कहते हैं *बबोटेयर* - दूसरा तरीक़ा ये नया निकाला गया है कि जानवर को एक कटहरे म...

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*क़ुर्बानी ही क्यों-7* *ⓩ अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त का कोई भी काम मस्लिहत से खाली नहीं होता और क़ुर्बानी में भी कई मस्लिहतें ज़ाहिर है,चन्द मुलाहज़ा फरमायें* *1* - मौला तआला का हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम को क़ुर्बानी का हुक्म देना और फिर हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम का अपने 100 ऊंटों को खुदा की राह में कुर्बान कर देना मगर फिर भी उसी क़ुर्बानी का दोबारा और तिबारा हुक्म देना और फिर उनका अपने बेटे को क़ुर्बान करने का फैसला करना इस बात को ज़ाहिर करता है कि क़ुर्बानी का अस्ल मक़सद अपनी सबसे ज़्यादा महबूब चीज़ को खुदा की राह में क़ुर्बान करना है ना कि माल और ना जानवर,हालांकि ज़ाहिर में क़ुर्बानी हमें इसी की देनी है मगर अस्ल मक़सद ये है कि दुनिया में बन्दा सबसे ज़्यादा अगर किसी चीज़ को महबूब रखता है तो वो उसकी खुद की जान है ना मां ना बाप ना भाई ना बहन ना बीवी ना बच्चे और ना मालो-दौलत,अगर जान पर मुसीबत आती है तो सबको छोड़ छोड़कर बन्दा सबसे पहले अपनी जान बचाता है बाद में सबकी फिक्र करता है तो मौला तआला उसी जान को अपनी राह में यानि दीन के लिए क़ुर्बान कर देने को तैयार रहने को कह रहा है ताकि ज़रूरत पड़ने पर बन्दा अपनी जान क़...

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*मसाइले क़ुर्बानी-5* *मसअला* - बड़े जानवर की क़ुर्बानी करने में अक़ीक़े की शिरकत हो सकती है 📕 बहारे शरीयत,हिस्सा 15,सफह 155 *ⓩ अक़ीक़ा बच्चे की पैदाईश से 7वें दिन करना सुन्नत है लेकिन अगर नहीं किया है तो उम्र भर में कभी भी कर सकता है सुन्नत अदा हो जायेगी,अक़ीक़े में लड़के के लिए 2 बकरा और लड़की के लिए 1 बकरी ज़बह करना अफज़ल है लेकिन अगर लड़के में 2 की जगह 1 कर दिया या बकरे की जगह बकरी कर दिया तब भी अक़ीक़ा हो जायेगा युंही लड़की में 1 की जगह 2 कर दिया और बकरी की जगह बकरा कर दिया तब भी अक़ीक़ा हो गया,इसी तरह बड़े जानवर में हिस्सा भी ले सकते हैं यानि लड़के के लिए 2 हिस्सा और लड़की के लिए 1 और अगर दोनों के लिए 1-1 हिस्सा ले लिया तो भी जायज़ है,तो अब अगर क़ुर्बानी के लिए बड़ा जानवर लाया और उसमे 4 हिस्से क़ुबानी के हैं और 3 हिस्से को अक़ीक़ा करना चाहता है तो कर सकता है जायज़ है बस अक़ीक़े की नियत कर लेना काफी है बाकी अक़ीक़े के लिए जो दुआ पढ़ी जाती है उसका पढ़ना कोई ज़रूरी नहीं बिस्मिल्लाह अल्लाहु अकबर पढकर जानवर ज़बह कर देना काफी है और अवाम में ये जो मशहूर है कि अक़ीक़े का गोश्त बच्चे के मां-बाप दादा-दादी नाना-नानी नहीं खा स...

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*मसाइले क़ुर्बानी-4* *मसअला* - क़ुर्बानी का गोश्त काफिर को हरगिज़ ना दें और बदमज़हब मुनाफिक़ तो काफिर से बदतर है लिहाज़ा उसको भी हरगिज़ ना दें 📕 बहारे शरियत,हिस्सा 15,सफह 144 *ⓩ वहाबी देवबंदी क़ादियानी खारजी राफज़ी अहले हदीस जमाअते इस्लामी और जितने भी बद मज़हब फिरके हैं उन सबको क़ुर्बानी का गोश्त नहीं दे सकते अगर देंगे तो गुनहगार होंगे* *मसअला* - जो जानवर को ज़बह करे बिस्मिल्लाह शरीफ वोह पढ़े किसी दूसरे के पढ़ने से जानवर हलाल ना होगा 📕 बहारे शरियत,हिस्सा 15,सफह 121 *ⓩ बेहतर है कि जिसके नाम से क़ुर्बानी हो रही है वो बिस्मिल्लाह अल्लाहु अकबर कहकर छुरी चलाये वरना जो भी ज़बह करे वो पढ़े* *मसअला* - ज़बह के वक़्त जानबूझकर बिस्मिल्लाह शरीफ ना पढ़ी तो जानवर हराम है और अगर पढ़ना भूल गया तो हलाल है 📕 बहारे शरियत,हिस्सा 15,सफह 119 📕 ज़बीहे इसाले सवाब,सफह 15 *ⓩ सुन्नी साहियुल अक़ीदा मुसलमान जान बूझकर ऐसा कर ही नहीं सकता हां निस्यानन यानि भूल से ही ऐसा हो सकता है लिहाज़ा सुन्नी का ज़बीहा हलाल है लेकिन अगर किसी सुन्नी ने जानबूझकर बिस्मिल्लाह नहीं पढ़ा तो जानवर हराम युंहि अगर वहाबी बिस्मिल्लाह शरीफ पढ़कर भी ज़बह करे तब...

फज़ाइले क़ुर्बानी

*मसाइले क़ुर्बानी-3* *मसअला* - क़ुर्बानी का वक़्त 10 ज़िल्हज्ज के सुबह सादिक़ से लेकर 12 के ग़ुरुबे आफताब तक है मगर जानवर रात में ज़बह करना मकरूह है 📕 *बहारे शरियत,हिस्सा 15,सफह 136* *ⓩ चुंकि गांव में ईद की नमाज़ नहीं है लिहाज़ा वहां सूरज निकलने के साथ ही क़ुर्बानी हो सकती है मगर शहर में जब तक कि पहली नमाज़ ना हो जाए क़ुर्बानी नहीं हो सकती हैं चाहे इसने पढ़ी हो या ना पढ़ी हो इससे मतलब नहीं,और अगर किसी ने नमाज़ से पहले क़ुर्बानी कर ली तो उसका गोश्त तो खा सकता है मगर क़ुर्बानी दूसरी करनी होगी वरना गुनाहगार होगा,युंही अगर दिन में क़ुर्बानी करने वाला ना मिला या किसी तरह की पाबन्दी लगी हुई है तो रात में क़ुर्बानी कर सकते हैं जायज़ है* *मसअला* - जानवरों की उम्र ये होनी चाहिए ऊंट 5 साल,गाय-भैंस 2 साल,बकरा-बकरी 1 साल,भेड़ का 6 महीने का बच्चा अगर साल भर के बराबर दिखता है तो क़ुर्बानी हो जायेगी 📕 *बहारे शरियत,हिस्सा 15,सफह 139* *ⓩ जानवरो की जो उम्र बताई गई उसमे अगर 1 दिन भी कम होगा क़ुर्बानी नहीं होगी मसलन किसी बकरी ने बच्चा तीसरी बक़र ईद को दिया तो अगले साल पहले और दूसरे दिन भी उसकी क़ुर्बानी नहीं हो सकती हां दूसर...

फज़ाइले क़ुर्बानी

*मसाइले क़ुर्बानी-2* *मसअला* - साहिबे निसाब यानि जिसके पास 7.5 तोला सोना या 52.5 तोला चांदी या इसके बराबर की रक़म जो कि तक़रीबन 26000 रू बन रही है अगर क़ुर्बानी के दिनों में मौजूद है तो उस पर क़ुर्बानी वाजिब है,क़ुर्बानी वाजिब होने के लिये माल पर साल गुज़रना ज़रूरी नहीं 📕 बहारे शरियत,हिस्सा 15,सफह 132 *ⓩ जिसके पास 26000 रू कैश या इतने का सोना-चांदी या हाजते असलिया के अलावा कोई सामान है तो क़ुर्बानी वाजिब है युंही साल भर तो फक़ीर था मगर क़ुर्बानी के 3 दिनों में कहीं से उसे 26000 रू मिल गया क़ुर्बानी वाजिब हो गयी,किसी के पास कई मकान हैं और वो सब उसके खुद के रहने के लिए है अगर चे वो करोड़ों की कीमत रखते हों तब भी वो हाजते असलिया में दाखिल है क़ुर्बानी नहीं लेकिन अगर किसी मकान में किरायेदार को बसा दिया और उसका किराया इतना है कि निसाब को पहुंच जाये तो क़ुर्बानी वाजिब होगी,उसी तरह दुकानदार का काम करने का सामान मस्लन उसके औज़ार मशीनें फर्नीचर पर्सनल इस्तेमाल का सामान हाजते असलिया में दाखिल है,एसी-फ्रिज-बाईक-फोर व्हीलर अगर चे कई सारी मौजूद हो फिर भी ये सब हाजते असलिया में दाखिल हैं मगर टी.वी हाजते असलिया...

फज़ाइले क़ुर्बानी

*Post-1*                      *फज़ाइले क़ुर्बानी* *फुक़्हा* - जिन लोगों पर क़ुर्बानी वाजिब नहीं वो अगर ज़िल्हज्ज के 10 दिनों तक बाल नाखून ना काटें तो क़ुर्बानी का सवाब पायेंगे 📕 बहारे शरियत,हिस्सा 15,सफह 131 *ⓩ आज चांद की 29 तारीख है लिहाज़ा बाल नाखून वग़ैरह काट लें जिन पर क़ुर्बानी वाजिब है वो तो ऐसे ही क़ुर्बानी तक रुके रहें उनके लिए यही अफज़ल है लेकिन अगर गलती से या जानबूझकर भी नाखून या बाल कटवा लिया तो भी अपने नाम से क़ुर्बानी करा सकता है,मखसूस जानवर को मखसूस दिन ज़बह करने को क़ुर्बानी कहते हैं,क़ुर्बानी हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की सुन्नत है जो इस उम्मत में भी बाकी रखी गयी है,मौला तआला क़ुर्आन में इरशाद फरमाता है कि* *कंज़ुल ईमान* - अपने रब के लिए नमाज़ पढ़ो और क़ुर्बानी करो  📕 पारा 30,सूरह कौसर,आयत 2 *ⓩ आज कल एक मैसेज आ रहा है कि इसको बक़र ईद ना कहें बल्कि ईदुल अज़हा कहें तो ईदुल अज़हा कहना अच्छा है मगर ये कि बक़र ईद ना कहें ये सिवाए जिहालत के और कुछ नहीं है,बक़र माने गाय होती है और इस नाम से क़ुर्आन में पूरी एक सूरह सूरह बक़र के नाम से ...
🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🖼ﺃﻋﻮﺫ ﺑﺎﻟﻠﻪ ﻣﻦ ﺍﻟﺸﻴﻄﺎﻥ ﺍﻟﺮﺟﻴﻢ ﺑِﺴْــــــــــــــــﻢِﷲِﺍﻟﺮَّﺣْﻤَﻦِﺍلرَّﺣِﻴﻢ* *السلام علیکم ورحمۃ اللہ وبر ر کا تہ🖼* *अल्लाह के नाम से शुरू जो बहुत मेहरबान रहमत वाला..* *🕋 الصــلوة والسلام عليك يارسول الله ﷺ 🕋* *👉 post 17 ✔️*  *📝SAWAL-:* *📇 EID UL AZHA KI 09 TARIKH KA ROZA HAJI KO RAKHNA KAISA HAI* *✍JAWAB-;* *📇 Ye Roza Haajiyo Ke Liye Rakhna Behtar Nahi Kyunki Aap ﷺ Ne Apne Hajj Ke Waqt Ye Roza Nahi Rakha* *Allah Ke Rasool Sallallaahu Alaihi Wa Sallam Ne Arfe Ke Din Arafat Mein Roza Rakhne Se Man'a Farmaaya* *📚Sahih muslim, Hadees No.1123* *📚Sunan-E Abu Daawood: Hadees 2440* *👉 NOTE; Magar Arafat Mein Maujood Haji Ko Arfe Ke Din Ka Roza Makrooh Hai. Jaisa Ke Hadees Me Hai Ye Roza Jo Haji Is Saal Hajj Ke Liye Gaye Hai Unke Liye Nahi Hai* *⚔ SULHE KULLI NABI KA NAHI SUNNIYO ⚔*  *⚔ SUNNI MUSLIM HAI SACHCHA NABI KE LIYE ⚔* *🌴Kabe K Badrud Duja Tumpe Karodoñ Darood.........🌴* *📿Tayba Ke Samsud Doha Tumpe Karodon Darood...........📿* *👑Mere Ustaad...
🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴   *🥀 HAJJ ⓂUBARAK 🥀* _✏️ *Hajj-E-Ak'Bar Kise Kehte Hai...❓*_ 💎 Hajj-E-Ak'Bar Ka Laf'Z Quraan Me Istimaal Huwa Hai, Jis Ki Tafseer Ak'Sar Mufassireen Ne Ye Bayan Ki Hai Ke *Yaum-E-Arafaa* Ka Din Muraad Hai, *💐 Dusri Ek Baat Hai Ke Hajj-E-Ak'Bar Yaumu Nahar Ko Kehte Hai,* Tisri Baat Ye Hai Hajj-E-Ak'Bar Ko Umarah Ke Muqabil Me Hajj Ko Bola Jata Hai Ke Um'Rah Ye Chhota Hajj Aur Hajj Ye Hajj-E-Ak'Bar Hai, *✏️ Chothi Baat Jo Awaam Me Mash'Hoor Hai Ke Jo Arafaat Ka Din _"Jumma Ka Din"_ Ho To Wo Hajj Hajj-E-Ak'Bar Hai Is Ki Koi Haqeeqat Nahi Hai,* 👉 Al Batta Itna Zarur Hai Ke Ek Zaeef Darjah Ki Riwayat Se Ye Maalum Hota Hai Ke Jo Arafaat Ka Din Jumma Ka Ho To Us Hajj Ka Sawab 70 Guna Badh Jata Hai, *Aur Sab Ki Aam Maghfirat Ki Khush Khabari Hai,.* ✏️ Aur _Aap ﷺ Sal Lallahu Alayhi Wasallam_ Ke Hajj Me Bhi Arafaat Ka Din Jumma Ka Tha. *Wallahu Aa'Alam.* 📚 (Mustafad Az Fatawa Mahmudiyah 10/295).. 👑👑👑👑👑👑👑👑👑...
*🖼ﺃﻋﻮﺫ ﺑﺎﻟﻠﻪ ﻣﻦ ﺍﻟﺸﻴﻄﺎﻥ ﺍﻟﺮﺟﻴﻢ ﺑِﺴْــــــــــــــــﻢِﷲِﺍﻟﺮَّﺣْﻤَﻦِﺍلرَّﺣِﻴﻢ* *السلام علیکم ورحمۃ اللہ وبر ر کا تہ🖼* *अल्लाह के नाम से शुरू जो बहुत मेहरबान रहमत वाला..* *🕋 الصــلوة والسلام عليك يارسول الله ﷺ 🕋* *👉 post 15 ✔️*  *📝SAWAL-:* *📇 Kya Puri Zindgi Me Hajj 1 Baar Farz Hai* *✍️ JAWAB-;* *📇 Huzoor Nabi e Kareem ﷺ irshad farmate haiñ Aye logon Khuda ne tum par hajj farz kiya hai Hazrat e Aqra Ibne Haabis رضي الله عنه ne arz kiya Ya RasoolAllah ﷺ kya har saal hajj farz hai Sayyed e Aalam ﷺ irshad farmate haiñ agar Maiñ haa kardu to har saal hajj farz hojaaye to tum usse adaa karne ki taakat nahi rakhte isliye hajj poori zindagi mein ek martaba farz hai aur jo shakhs isse zyada kare woh nafl hai*  *📚 Mishkat Shareef, Safah 221* *⚔ SULHE KULLI NABI KA NAHI SUNNIYO ⚔*  *⚔ SUNNI MUSLIM HAI SACHCHA NABI KE LIYE ⚔* *🌴Kabe K Badrud Duja Tumpe Karodoñ Darood.........🌴* *📿Tayba Ke Samsud Doha Tumpe Karodon Darood...........📿* *👑Mere Ustaad-e-Mohtram Farmate Hai👇?...
🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴   *🥀 HAJJ ⓂUBARAK 🥀* *💎 _Eid-Ul-Fitr Aur Eid-Ul-Adha Ka Roza Nahi …._* 🌴 Mafhum-e-Hadees: Abu Saeed Khudri رضي اللّه تعالى عنه Se Riwayat Karte Hain Ke: *“RASOOL'ALLAH ﷺ Ne “Eid-Ul-Fitr Aur Eid-Ul-Azha Ke Din Roza Rakhne Se Mana Kiya Hai”.* *📚 (Bukhari Sharif)* 🌅 Saal Me 05 Din Roze Rakhna *Haram Hai❓* *_✏️Eid ul Fitr (Ramzaan Eid) Aur Eid ul Adha (Bakra Eid) Ke 4 Din Yani 10, 11, 12, 13 Zilhijjah Ko Roza Rakhna Haram Hai._* *📚 (Kitab Fazayl e Ramzan Shareef, Page No.1 47)*        👑👑👑👑👑👑👑👑👑👑 *🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴*

Gaaye Ki Qurbaani

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 Gaaye Ki Qurbaani 🥀* *【POST 09】* _Ek Roz (Ala Hazrat Rehamtullah Allay) Bad Namaz E Asar Masjid Se Tashrif Laye. Us Waqt Hazrin Me Maulana Amjad Ali Sahab Azmi (Allay Rehmtullah Gani) Bhi They: Risala Anfusal Fikr Fi Qurbaan Ul Baqr" Un Dono Tabah Ho Raha Tha. Is Me Molvi Abdul Hayi Sahab Ke Do Fatwe Ke Qurbaani Gao Se Mutliq They, Is Risala Me Naqal Kiye Gaye They Isi Risala Ki Nisbat Tazkira Ho Raha Tha. Un Fatwo Ka Bhi Zikar Aya Is Par Maualana Se Famraya:_ _*Irshad:- Molvi Sahab Hinud (Yani Hinduo) Ke Dhoke Me Aa Gaye, Musalmano Ke Khilaf Fatwa Likh Dia. Tambiyah (Yani Samajane) Par Mutnabad (Yani Khabardar) Hue. Yahi Sawal Mere Pass Bhi Aya Tha Bafazal Ta'la Bangah E Awalin (Yani Pehli Nazar Me) Makr E Makaara (Yani Makaaro Ki Chalaki) Pehchan Gaya Aur Kur Ba Kashtan Roz E Awal Baid" (Yani Burai Ko Pehle Hi Di Se Rok Dena Chaiye.) Par Amal Kia.*_ *Wallahul Hamd.* 💫 *Apne Faham Par Aitmaad Kiye Nuqsanaat* _Arz:- Huzur In Ke Fatawe Dekhne Se ...