हज़रते अहमद बीन इस्हाक़ अलैरहमा फरमाते है 2⃣3⃣
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*🥀 कुर्बानी के मसाइल 🥀*
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💎 *हज़रते अहमद बीन इस्हाक़ अलैरहमा फरमाते है :*
✏️ मेरा भाई बा वुजुदे गुरबत रिज़ाएे इलाही की निय्यत से हर साल बकरा ईद में क़ुरबानी किया करता था। उस के इंतिक़ाल के बाद मैं ने एक ख्वाब देखा कि क़यामत बरपा हो गई है और लोग अपनी अपनी क़ब्रो से निकल आए है, यकायक मेरा मर्हुम भाई एक अब्लक़ (यानी दो रंगे चितकुब्रे) घोड़े पर सुवार नज़र आया, उसके साथ और भी बहुत सारे घोड़े थे।
*🌺 मेने पूछा : ऐ मेरे भाई ! अल्लाह ने तेरे साथ क्या मुआमला फ़रमाया ? कहने लगा* *: अल्लाह ने मुझे बख्श दिया। पूछा : किस अमल के सबब ? कहा : एक दिन किसी गरीब बुढ़िया को ब निय्यते सवाब मैं ने एक दिरहम दिया था वही काम आ गया। पूछा : ये घोड़े कैसे है ? बोला : ये सब मेरी* *बक़रा ईद की कुर्बानिया है* *और जिस पर में सुवार हु ये मेरी सबसे पहली क़ुरबानी है। मैने पूछा : अब कहा का अज़्म है ? कहा : जन्नत का।*
🌴 ये कह कर मेरी नज़र से ओझल हो गया। अल्लाह की उन पर रहमत हो ओर उनके सदके हमरी बे हिसाब मगफिर हो,,
_*📚 (अब्लक़ घोडा पेज 1).*_
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*🏁 मसलके आला हजरत 🔴*
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