फज़ाइले क़ुर्बानी

       *अरफा व ईदुल अज़्हा-9*





*हदीस* - हुज़ूर सल्लललाहु तआला अलैहि वसल्लम फरमाते हैं कि अरफा यानि 9वीं ज़िल्हज्ज का रोज़ा अगले व पिछले 1 साल के गुनाहों का कफ्फारा है

📕 मुस्लिम,जिल्द 1,सफह 819

*ⓩ आज इलाहाबाद में खत्मे सहर 4:18 पर है तो अगर कोई रोज़ा रखना चाहे तो इससे पहले ही सहरी खत्म कर ले,एक और बात चुंकि ये रोज़ा नफ्ल है तो अगर किसी का कभी का कोई भी रोज़ा रमज़ान का बाकी हो तो बजाये नफ्ल नियत करने के वो रमज़ान के क़ज़ा की नियत करले तो उसका एक रोज़ा अदा भी हो जायेगा और अरफे में रोज़ा रखने की भी फज़ीलत पायेगा इन शा अल्लाह तआला*

*आमाल* - अरफे की रात यानि आज 2 रकात नमाज़ नफ्ल इस तरह पढ़ें कि पहली में सूरह फातिहा के बाद 100 बार आयतल कुर्सी और दूसरी में 100 बार सूरह इखलास,तो क़यामत के दिन इस नमाज़ की बरकत से मौला तआला उसको और उसके घर व अज़ीज़ों से 70 लोगों की बख्शिश फरमायेगा 

📕 बारह माह के फज़ायल,सफह 484

*तकबीरे तशरीक़* - 9वीं ज़िल हज्ज की फज्र से लेकर 13वीं की अस्र तक बा जमाअत नमाज़ पढ़ने वालों को हर फर्ज़ नमाज़ के बाद तकबीरे तशरीक़ 1 बार पढ़ना वाजिब और 3 बार कहना मुस्तहब है,जिनकी कुछ रकातें छूट गयी हो वो अपनी पढ़ने के बाद कहें,तन्हा नमाज़ पढ़ने वालों और औरतों पर वाजिब नहीं मगर बेहतर है कि वो भी पढ़ें,नफ्ल व सुन्नत व वित्र के बाद वाजिब नहीं मगर जुमा के बाद वाजिब है

📕 बहारे शरियत,हिस्सा 4,सफह 110

*ⓩ ईद के दिन ये काम मुस्तहब यानि बेहतर है*

! हजामत बनवाना

! नाखून काटना 

! गुस्ल करना 

! अच्छे कपड़े पहनना,नया हो तो नया वरना धुला हुआ हो 

! अंगूठी पहनना,मर्द को साढ़े चार माशा से कम की एक  

! खुशबु लगाना

! ईद की नमाज़ के लिये ईदगाह जाना 

! ईदगाह पैदल जाना

! रास्ते मे बुलंद आवाज़ से तकबीरे तशरीक़ पढ़ना

! ईदगाह को जाते वक़्त आखों को नीची रखना 

! दूसरे रासते से वापस आना

! नमाज़ से पहले कुछ ना खाना अगर चे क़ुर्बानी ना भी करता हो

! खुशी ज़ाहिर करना 

! कसरत से सदक़ा देना 

! आपस मे एक दूसरे को मुबारकबाद देना 

📕 बहारे शरियत,हिस्सा 4,सफह 109

*नमाज़े ईद* - नियत युं करें "नियत की मैंने 2 रकात नमाज़ ईदुल अज़हा वाजिब मय ज़ायद 6 तकबीरो के वास्ते अल्लाह तआला के पीछे इस इमाम के मुंह मेरा काबे शरीफ की तरफ अल्लाहु अकबर" कहकर नियत बांध लें और सना पढ़ें फिर इमाम सना पढ़कर 3 तकबीर बोलेगा 2 तकबीर में हाथ कानों तक ले जाकर छोड़ दें और तीसरी तकबीर में कानों तक हाथ ले जाकर बांध लें,इमाम के साथ पहली रकात पूरी करके दूसरी के क़याम में बाद सूरह फातिहा व सूरह के रुकू में जाने से पहले इमाम 4 तकबीर बोलेगा 3 तकबीर में हाथ कानों तक ले जाकर छोड़ दें और चौथी में बिना हाथ उठाये रुकू में चले जायें और इमाम के साथ अपनी नमाज़ पूरी करें,खुत्बा सुनना वाजिब है लिहाज़ा खामोशी के साथ बिना कोई फिज़ूल हरकत किये ख़ुत्बा सुने और दुआ करें

*क़ुर्बानी* - क़ुर्बानी के ज़्यादातर मसायल मैं बता चुका हूं अब क़ुर्बानी कैसे करें ये भी समझ लीजिये,जानवर को खाना पानी दिखाते रहिये और छुरी वगैरह पहले से ही तेज़ करके रखें,एक के सामने दूसरे जानवर को हरगिज़ ज़बह ना करें,जब जानवर को ज़बह करने का इरादा हो जाए तो जिसको ज़बह करना हो वो पहले से ही क़ुर्बानी की दुआ पढ़ले......फिर जानवर को बायें पहलु पर इस तरह लिटा दें कि उसका मुंह क़िब्ले की जानिब हो और अपना दायां पैर उसके पहलु पर रखकर फौरन जल्दी से बिस्मिल्लाह अल्लाहु अकबर कहकर ज़बह कर दें,फिर उसके बाद दुआ पढ़ें (तकबीरे तशरीक़ व दुआ के लिये इमेज देखें) अगर क़ुर्बानी अपनी तरफ से है तो वही अलफाज़ अदा करें और अगर दूसरे की तरफ से ज़बह किया है तो *मिन्नी* की जगह *मिन* कहकर उसका नाम फिर उसके बाप का नाम लें,अगर लड़की शादी शुदा है तो उसके नाम के साथ *बिन्त* कहने की बजाये *ज़ौजा* कहकर उसके शौहर का नाम लें

📕 बहारे शरियत,हिस्सा 15,सफह 150

खत्म...........

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