फज़ाइले क़ुर्बानी
*मसाइले क़ुर्बानी-5*
*मसअला* - बड़े जानवर की क़ुर्बानी करने में अक़ीक़े की शिरकत हो सकती है
📕 बहारे शरीयत,हिस्सा 15,सफह 155
*ⓩ अक़ीक़ा बच्चे की पैदाईश से 7वें दिन करना सुन्नत है लेकिन अगर नहीं किया है तो उम्र भर में कभी भी कर सकता है सुन्नत अदा हो जायेगी,अक़ीक़े में लड़के के लिए 2 बकरा और लड़की के लिए 1 बकरी ज़बह करना अफज़ल है लेकिन अगर लड़के में 2 की जगह 1 कर दिया या बकरे की जगह बकरी कर दिया तब भी अक़ीक़ा हो जायेगा युंही लड़की में 1 की जगह 2 कर दिया और बकरी की जगह बकरा कर दिया तब भी अक़ीक़ा हो गया,इसी तरह बड़े जानवर में हिस्सा भी ले सकते हैं यानि लड़के के लिए 2 हिस्सा और लड़की के लिए 1 और अगर दोनों के लिए 1-1 हिस्सा ले लिया तो भी जायज़ है,तो अब अगर क़ुर्बानी के लिए बड़ा जानवर लाया और उसमे 4 हिस्से क़ुबानी के हैं और 3 हिस्से को अक़ीक़ा करना चाहता है तो कर सकता है जायज़ है बस अक़ीक़े की नियत कर लेना काफी है बाकी अक़ीक़े के लिए जो दुआ पढ़ी जाती है उसका पढ़ना कोई ज़रूरी नहीं बिस्मिल्लाह अल्लाहु अकबर पढकर जानवर ज़बह कर देना काफी है और अवाम में ये जो मशहूर है कि अक़ीक़े का गोश्त बच्चे के मां-बाप दादा-दादी नाना-नानी नहीं खा सकते महज़ बे अस्ल है ऐसा कुछ नहीं है उस गोश्त का वही हुक्म है जो क़ुर्बानी का है*
*मसअला* - औरत और समझदार बच्चे का ज़बीहा हलाल है,पागल नासमझ बच्चा और मुर्तद का ज़बीहा हराम है
📕 फतावा मुस्तफविया,सफह 434
*मसअला* - गले में 4 रग होती है 1.हलक़ूम जिससे सांस आती है 2.मिर्री जिससे खाना पानी उतरता है और दो रगें खून की रवानी के लिए होती हैं जिन्हे जबीन कहा जाता है,ज़बह में इन चारों में से 3 का कट जाना काफी है और अगर सबका अक्सर हिस्सा कट गया तब भी जानवर हलाल होगा लेकिन अगर सबका आधा हिस्सा कटा और आधा रह गया तो हलाल नहीं होगा
📕 बहारे शरीयत,हिस्सा 15,सफह 116
*मसअला* - जो बकरे खस्सी नहीं किये जाते वो अक्सर अपना ही पेशाब पीना शुरू कर देते हैं या कुछ जानवर गाय भैंस बकरा बकरी मुर्गा वगैरह नजासत खाने लग जायें तो उनके गोश्त में बदबू आ जाती है ऐसो को जल्लाला कहते हैं,इसके लिए उन्हें कुछ दिन बांधकर रखा जाये ताकि वो नजासत ना खाने पायें फिर उन्हें ज़बह करें अगर बदबू ना हो तो खायें और अगर बू है तो मना है
📕 बहारे शरीयत,हिस्सा 15,सफह 127
*मसअला* - क़ुर्बानी के वक़्त जानवर उछला कूदा जिससे उसे चोट लग गई ऐबदार हो गया तो ये ऐब मायने नहीं रखता क़ुर्बानी हो जायेगी
📕 बहारे शरीयत,हिस्सा 15,सफह 141
*मसअला* - क़ुर्बानी का जानवर खो गया या मर गया तो लाज़िम है कि दूसरा जानवर क़ुर्बानी करे और अगर दूसरा जानवर लाया और गुम हुआ जानवर मिल गया तो जो मंहगा हो वो क़ुर्बानी करे और अगर सस्ता वाला क़ुर्बानी करेगा तो जितनी कीमत का फर्क आयेगा उतनी कीमत सदक़ा करे,दोनो की भी क़ुर्बानी कर सकता है
📕 बहारे शरीयत,हिस्सा 15,सफह142
*मसअला* - अगर 2 लोग साथ में छूरी चला रहे हैं तो ज़बह के वक़्त दोनों को बिस्मिल्लाह पढ़ना वाजिब है अगर एक ने भी तर्क किया तो जानवर हराम है
📕 बहारे शरीयत,हिस्सा 15,सफह 149
*मसअला* - एक ही आदमी कई जानवर को अपने नाम से क़ुर्बानी करना चाहता है तो कर सकता है एक वाजिब होगी बाकी सब नफ्ल,और बड़ा जानवर एक नाम से ज़बह कर दिया तो एक ही माना जायेगा ना कि 7वां हिस्सा
📕 बहारे शरीयत,हिस्सा 15,सफह 150
*मसअला* - क़ुर्बानी की खाल उसका गोश्त उसका सर या पैर कोई भी चीज़ काटने वाले को उसकी उजरत के बदले नहीं दे सकते कि ये भी बेचना ही हुआ हां तोहफतन दे सकते हैं जैसे कि और मुसलमान को देते हैं मगर खाल नहीं दे सकते
📕 बहारे शरीयत,हिस्सा 15,सफह 145
*मसअला* - क़ुर्बानी की खाल को अपने लिए बेचना मना है और हर दीनी व मिल्ली काम या मदारिस में सदक़ा की जा सकती है या बेचकर उसकी कीमत भी दे सकता है
📕 बहारे शरीयत,हिस्सा 15,सफह 144
*ⓩ ज़ेबन्युज़ चैरिटेबल ट्रस्ट में भी ये ताऊन किया जा सकता है*
जारी रहेगा...........
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