फज़ाइले क़ुर्बानी
*मसाइले क़ुर्बानी-3*
*मसअला* - क़ुर्बानी का वक़्त 10 ज़िल्हज्ज के सुबह सादिक़ से लेकर 12 के ग़ुरुबे आफताब तक है मगर जानवर रात में ज़बह करना मकरूह है
📕 *बहारे शरियत,हिस्सा 15,सफह 136*
*ⓩ चुंकि गांव में ईद की नमाज़ नहीं है लिहाज़ा वहां सूरज निकलने के साथ ही क़ुर्बानी हो सकती है मगर शहर में जब तक कि पहली नमाज़ ना हो जाए क़ुर्बानी नहीं हो सकती हैं चाहे इसने पढ़ी हो या ना पढ़ी हो इससे मतलब नहीं,और अगर किसी ने नमाज़ से पहले क़ुर्बानी कर ली तो उसका गोश्त तो खा सकता है मगर क़ुर्बानी दूसरी करनी होगी वरना गुनाहगार होगा,युंही अगर दिन में क़ुर्बानी करने वाला ना मिला या किसी तरह की पाबन्दी लगी हुई है तो रात में क़ुर्बानी कर सकते हैं जायज़ है*
*मसअला* - जानवरों की उम्र ये होनी चाहिए ऊंट 5 साल,गाय-भैंस 2 साल,बकरा-बकरी 1 साल,भेड़ का 6 महीने का बच्चा अगर साल भर के बराबर दिखता है तो क़ुर्बानी हो जायेगी
📕 *बहारे शरियत,हिस्सा 15,सफह 139*
*ⓩ जानवरो की जो उम्र बताई गई उसमे अगर 1 दिन भी कम होगा क़ुर्बानी नहीं होगी मसलन किसी बकरी ने बच्चा तीसरी बक़र ईद को दिया तो अगले साल पहले और दूसरे दिन भी उसकी क़ुर्बानी नहीं हो सकती हां दूसरी बक़र ईद को वो पूरा 1 साल का हो गया तो अब तीसरी को उसकी क़ुर्बानी हो सकती है,यहां ये भी ज़हन में रखें कि जानवर बेचने वाले अक्सर झूठी कसमें खाकर या ये कहकर कि घर का पला जानवर है 1 साल का पूरा हो चुका है बेच देते हैं,आपने खरीद लिया मगर कई लोगों ने देखने के बाद बताया कि वो 1 साल का नहीं है तो अगर वो लोग जानवरों की अच्छे जानकार हैं तो उसकी क़ुर्बानी नहीं हो सकती लिहाज़ा जानवर जांच कर साथ खरीदें*
*मसअला* - काना,लंगड़ा,लागर,बीमार,जिसकी नाक या थन कटा हो,जिसका कान या दुम तिहाई से ज्यादा कटी हो,बकरी का 1 थन या भैंस का 2 थन खुश्क हो ऐसे जानवरों की क़ुर्बानी नहीं हो सकती
📕 *बहारे शरियत,हिस्सा 15,सफह 139*
*ⓩ क़ुर्बानी के जानवर को ऐब से खाली होना चाहिये अगर ज़्यादा ऐबदार है तो क़ुर्बानी नहीं होगी और अगर थोड़ा भी ऐब होगा तो क़ुर्बानी तो हो जायेगी मगर मकरूह है,जानवर की पैदाईशी सींग नहीं है तो क़ुर्बानी हो जायेगी मगर सींग थी और जड़ से टूट गयी क़ुर्बानी नहीं हो सकती अगर थोड़ी सी टूटी है तो हो जायेगी,भैंगे की क़ुर्बानी हो जायेगी मगर अंधे की नहीं युंही जिसका काना पन ज़ाहिर हो उसकी भी क़ुर्बानी जायज़ नहीं,इतना बीमार है कि खड़ा होता है तो गिर जाता है या इतना लागर है कि चल भी नहीं सकता क़ुर्बानी नहीं हो सकती,जानवर का कोई भी उज़ू अगर तिहाई से ज़्यादा कटा है तो क़ुर्बानी नहीं हो सकती,जिसके पैदाईशी कान ना हो या एक ही कान हो क़ुर्बानी नहीं हो सकती,जिसके दांत ही ना हो या जिसके थन कटे हों या एक दम सूख गए हों क़ुर्बानी नहीं हो सकती,जिसकी नाक कटी हो या जिसमें नर व मादा दोनों की अलामत हो क़ुर्बानी नहीं हो सकती*
*मसअला* - मय्यत की तरफ से क़ुर्बानी की तो गोश्त का जो चाहे करे,लेकिन किसी ने अपनी तरफ से क़ुर्बानी करने को कहा और मर गया या क़ुर्बानी अगर मन्नत की है तो उसका गोश्त ना खुद खा सकता है ना ग़नी को दे सकता है बल्कि पूरा गोश्त सदक़ा करे
📕 *बहारे शरियत,हिस्सा 15,सफह 144*
*ⓩ यानि किसी ने वसीयत की कि मेरी तरफ से क़ुर्बानी करना और वो मर गया या किसी ने अपनी मन्नत की क़ुर्बानी की तो उसमे से एक बोटी भी नहीं खा सकता बल्कि पूरा गोश्त सदक़ा करे अगर खा लेगा तो जितना खाया है उतने का माल सदक़ा करे और अगर खुद किसी मय्यत के नाम से ईसाले सवाब की गर्ज़ से क़ुर्बानी की तो गोश्त खा सकता है*
जारी रहेगा...........
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