फज़ाइले क़ुर्बानी
*क़ुर्बानी ही क्यों-7*
*ⓩ अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त का कोई भी काम मस्लिहत से खाली नहीं होता और क़ुर्बानी में भी कई मस्लिहतें ज़ाहिर है,चन्द मुलाहज़ा फरमायें*
*1* - मौला तआला का हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम को क़ुर्बानी का हुक्म देना और फिर हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम का अपने 100 ऊंटों को खुदा की राह में कुर्बान कर देना मगर फिर भी उसी क़ुर्बानी का दोबारा और तिबारा हुक्म देना और फिर उनका अपने बेटे को क़ुर्बान करने का फैसला करना इस बात को ज़ाहिर करता है कि क़ुर्बानी का अस्ल मक़सद अपनी सबसे ज़्यादा महबूब चीज़ को खुदा की राह में क़ुर्बान करना है ना कि माल और ना जानवर,हालांकि ज़ाहिर में क़ुर्बानी हमें इसी की देनी है मगर अस्ल मक़सद ये है कि दुनिया में बन्दा सबसे ज़्यादा अगर किसी चीज़ को महबूब रखता है तो वो उसकी खुद की जान है ना मां ना बाप ना भाई ना बहन ना बीवी ना बच्चे और ना मालो-दौलत,अगर जान पर मुसीबत आती है तो सबको छोड़ छोड़कर बन्दा सबसे पहले अपनी जान बचाता है बाद में सबकी फिक्र करता है तो मौला तआला उसी जान को अपनी राह में यानि दीन के लिए क़ुर्बान कर देने को तैयार रहने को कह रहा है ताकि ज़रूरत पड़ने पर बन्दा अपनी जान क़ुर्बान कर सके,मगर हाल तो इतना बुरा हो चुका है कि जान तो बहुत दूर की बात हमसे तो चंद रूपये भी उसकी राह में नहीं खर्च किये जाते और बातें बड़ी बड़ी करते हैं मौला तआला हिदायत फरमाये
*2* - फिर क़ुर्बानी में जानवर ज़बह करना ही क्यों ज़रूरी है माल भी तो सदक़ा किया जा सकता है ये भी तो क़ुर्बानी ही हुई तो इसमें मस्लिहत ये है कि मालो दौलत बन्दे को कितनी ही अज़ीज़ क्यों ना हो मगर उससे क़ल्बी मुहब्बत नहीं हो सकती क्योंकि मुहब्बत के लिए एहसास का होना ज़रूरी है तो जानवर में अगर चे अक़्ल नहीं मगर जान तो है इसलिये उसमे एहसास पाया जायेगा लिहाज़ा जानवर से तो मुहब्बत हो सकती है मगर दौलत से नहीं हो सकती,अक्सर देखने में आता है कि घर के पाले हुए जानवर को काटने पर घर वाले रो देते हैं उनका रोना हरगिज़ अच्छा नहीं मगर उनके रोने से इतना तो साफ पता चलता है कि ये लोग उससे मुहब्बत करते थे और मौला तआला इसी मुहब्बत की क़ुर्बानी चाहता है वरना बेशुमार लोग अपने घरों में ग्यारहवीं और तोशे पर लाखों रूपये खर्च कर देते हैं मगर रोते नहीं मतलब साफ है माल अज़ीज़ है मगर उससे मुहब्बत नहीं इसलिए क़ुर्बानी जानवर की ही करनी होगी
*3* - फिर जानवर के ज़बह करने में एक मस्लिहत ये भी है कि दीन अगर चे इखलाक़ो मुहब्बत से फैला है मगर ज़रूरत पड़ने पर तलवार भी उठाई गयी है जंग भी की गयी है और कोई इसका इन्कार नहीं कर सकता लिहाज़ा जानवर ज़बह करने में मुसलमानो की एक तरह से तैयारी है कि बहुत से मुसलमान ऐसे देखने में आते हैं कि उन्हें खून देखकर ही चक्कर आने लगता है तो अब ज़रा सोचिये जिसे सिर्फ खून देखकर ही चक्कर आता हो वो क्या दीन के लिए अपनी शहादत देगा और क्या जंग करेगा लिहाज़ा ये डर ये खौफ ये झिझक निकालने के लिए भी जानवर की ही क़ुर्बानी पेश करनी होगी,लिहाज़ा मुसलमानों को चाहिये कि अपने रब की रज़ा के लिए इसमें बढ़ चढ़कर हिस्सा लें
*4* - इंसान के मुकाबले जानवर 10 गुना ज़्यादा हैं और उसमे भी वो जानवर जो हलाल हैं उनकी पैदाईश दूसरे जानवरो के मुकाबले और भी ज़्यादा है,तो अगर वो जानवर ज़बह ना किये जायें तो जो आज लाखों हैं कल करोड़ो पर अरबो होंगे और हमारी जगह उनकी जगह होगी और हमारी ग़िज़ा उनकी ग़िज़ा बन जायेगी,तो कुछ नाम निहाद मुसलमानो और काफिरों का ये कहना कि जानवर की क़ुर्बानी करना उन पर ज़ुल्म करना है इसे बंद होना चाहिये तो उनको बताना चाहूंगा कि ये जानवरों पर ज़ुल्म नहीं बल्कि जानवर और खुद उन पर एहसान है,जानवर पर इस तरह कि अगर कसरत से होंगे तो उनको खाने की परेशानी होगी उनकी रिहाइश में दिक़्क़त होगी और राह चलते उनकी दर्दनाक मौत होगी और बन्दों पर इस तरह की मुसलमान अगर गोश्त खाता है तो उसके गोश्त खाने में उसके साथ साथ दूसरों को भी हज़ार तरह के फायदे होते हैं मसलन
*मुसलमान गोश्त खायेंगे तो दाल सब्ज़ी बचेगी जो किसी दूसरे के काम आयेगी*
*कोई ज़बह करेगा तो उसको रोज़गार मिलेगा तो किसी का रोज़गार बचेगा*
*हमारे ज़बह से जानवरों की पैदावार पर लगाम लगती है जिससे किसी का खाना और रास्ता चलना आसान बनता है*
*लोगों को चमड़े की जैकेट चमड़े की बेल्ट पहनने का तो बड़ा शौक़ है मगर जब जानवर ज़बह नहीं होंगे तो ये चमड़ा क्या आसमान से आयेगा*
*जानवर की चर्बी उसकी हड्डी उसका खून साबुन तेल दवाओं और कई सारी चीज़ों में इस्तेमाल किया जाता है जब जानवर ज़बह ही नहीं होगा तो ये सब सामान क्या आसमान से उतरेंगे*
ⓩ चलते चलते एक आखिरी बात अगर कोई इन सब बातों को नज़र अंदाज़ कर भी दे या कोई इन सबका रद्द कर भी दे तब भी हमारे लिए खुदा जल्ला शानहु व हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम का फरमान ही काफी है लिहाज़ा हम तो जानवर की क़ुर्बानी करेंगे करेंगे करेंगे और दुनिया की कोई भी ताकत इसे रोक नहीं सकती इन शा अल्लाह तआला
जारी रहेगा...........
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