फज़ाइले क़ुर्बानी

*मसाइले क़ुर्बानी-10*

*मसअला* - औरत और समझदार बच्चे का ज़बीहा हलाल है,पागल नासमझ बच्चा और मुर्तद का ज़बीहा हराम है

📕 फतावा मुस्तफविया,सफह 434

*मसअला* - गले में 4 रग होती है 1.हलक़ूम जिससे सांस आती है 2.मिर्री जिससे खाना पानी उतरता है और दो रगें खून की रवानी के लिए होती हैं जिन्हे जबीन कहा जाता है,ज़बह में इन चारों में से 3 का कट जाना काफी है और अगर सबका अक्सर हिस्सा कट गया तब भी जानवर हलाल होगा लेकिन अगर सबका आधा हिस्सा कटा और आधा रह गया तो हलाल नहीं होगा

📕 बहारे शरीयत,हिस्सा 15,सफह 116

*मसअला* - जो बकरे खस्सी नहीं किये जाते वो अक्सर अपना ही पेशाब पीना शुरू कर देते हैं या कुछ जानवर गाय भैंस बकरा बकरी मुर्गा वगैरह नजासत खाने लग जायें तो उनके गोश्त में बदबू आ जाती है ऐसो को जल्लाला कहते हैं,इसके लिए उन्हें कुछ दिन बांधकर रखा जाये ताकि वो नजासत ना खाने पायें फिर उन्हें ज़बह करें अगर बदबू ना हो तो खायें और अगर बू है तो मना है

📕 बहारे शरीयत,हिस्सा 15,सफह 127

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