तकबीरे तशरीक़

*तकबीरे तशरीक़* 
अय्यामे तशरीक़ में ही यानी 9 नौमी ज़िलहिज्जा की फ़जर से ले कर 13 तेरहवीं ज़िलहिज्जा के असर तक हर फ़र्ज़ पंजगाना नमाज़ बाजमाअत के बाद जो तकबीर कही जाती है उसे ही तकबीरे तशरीक़ कहा जाता है, 
👉 तकबीरे तशरीक़ हर फ़र्ज़ नमाज़ पंजगाना बा-जमाअत के बाद 1 बार पढ़ना वाजिब और 3 बार पढ़ना अफ़ज़ल है
👉 तकबीरे तशरीक़ बाआवाज़ बुलंद पढ़ना वाजिब है
👉 तकबीरे तशरीक़ सलाम फेरने के तुरंत बाद कहना होता है
👉 अगर ताख़ीर किया जैसे मस्जिद से बाहर चला गया, जान कर वुज़ू तोड़ दिया, तो अब इससे तकबीर साकित हो गयी
👉 औरतों पर तकबीरे तशरीक़ वाजिब नही
👉 अकेले नमाज़ पढ़ने वालों पर तकबीर नही है, हां कह ले कियूंकि कि साहेबैन के नज़दीक उस पर भी वाजिब है
👉 नफ़्ल, वाजिब, सुन्नत के बाद तकबीरे तशरीक़ नही,
*📚 बहारे शरीअ़त, हिस्सा 04, सफ़ह 61-62*

*तकबीरे तशरीक़*
*اللَّهُ أَكْبَرُ اللَّهُ أَكْبَرُ لَا إلَهَ إلَّا اللَّهُ وَاَللَّهُ أَكْبَرُ اللَّهُ أَكْبَرُ وَلِلَّهِ الْحَمْد*

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