हिस्से वाली क़ुरबानी के मसाईल क्या है।*2️⃣4️⃣

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*🌹الصــلوة والسلام عليك يارسول الله ﷺ*
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*🧮 पोस्ट 101▪️*

*📝 सवाल-;*
*📇 हिस्से वाली क़ुरबानी के मसाईल क्या है।*

*✍️ जवाब-:*
*📇 क़ुरबानी का जानवर अच्छी सेहत, हट्टा-कट्टा, ऊंचा, बड़ा और खूबसूरत हो*
*बड़े जानवर की क़ुरबानी को कोई अकेला भी कर सकता है या उसमे सात लोग शरीक हो सकते हैं, हिस्से वाली क़ुरबानी में सात से कम रहेंगे तो भी क़ुरबानी हो जाएगी पर सात से ज़्यादा लोग शरीक नही हो सकते*
*अब अगर कोई बकरी, भेंड़ या दुम्बा वगैरह ले कर क़ुरबानी करें या हिस्से वाली क़ुरबानी करें दोनों सुरतों में वाजिब अदा हो जाएगा, चूंकि छोटे जानवर में अकेले की क़ुरबानी होती है और बड़े जानवर में सात लोग शरीक हो सकते हैं तो दोनों सूरतों में कोई हर्ज नहीं, हां अगर बड़े जानवर के एक हिस्से में छोटे जानवर से ज़्यादा गोश्त निकलता हो तो उस सूरत में हिस्से वाली क़ुरबानी करना अफ़ज़ल है*
*सात लोगों के शरीक होने से बड़ी क़ुरबानी में अगर किसी का इंतेक़ाल हो गया तो उसके वारिस में से इजाज़त मिली तो सब की क़ुरबानी हो गयी और इजाज़त ना ली तो किसी की ना हुई*
*सात लोगों में से कोई एक काफ़िर या बदमज़हब था या गुलाम था, या किसी एक कि नियत क़ुरबानी की ना थी बल्कि गोश्त हासिल करना था तो किसी की क़ुरबानी ना हुई*
*शरीक लोगों में से किसी की नीयत पिछले साल की क़ुरबानी की थी और बाकी की इसी साल की तो जिनकी नियत इस साल की थी उनकी क़ुरबानी हो गयी बाकी की नफ्ली क़ुरबानी हुई और उन सबको गोश्त सदक़ा करना होगा*
*हिस्से की क़ुरबानी के गोश्त को वज़न कर के सातों शरीक को तक़सीम किया जाएगा*
*किसी ने अकेले क़ुरबानी के लिए बड़े जानवर को खरीदा बाद में छः लोगों को उस क़ुरबानी में शरीक कर लिया तो ऐसा करना मकरूह है, और अगर खरीद वक़्त नियत कर लिया था कि अगर कोई शरीक होगा तो कर लूंगा तब मकरूह नही*
*अगर गैर मालिके निसाब ने अकेले के लिए क़ुरबानी के लिए बड़े जानवर को खरीदा तो अब उस पर क़ुरबानी वाजिब हो गयी अब उसमे किसी को शरीक नही कर सकता*
*किसी के ऊपर एक से ज़्यादा क़ुरबानी थी जैसे एक वाजिब और बाकी नफ़्ल की और उसने एक बड़ा जानवर ले कर ज़िबह किया तो सिर्फ वाजिब ही अदा होगा नफ़्ल नही*

*📚 बहार-ए-शरीअ्त, जिल्द 02 हिस्सा 15, सफ़ह 88*
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*💉 अपनी औलादो में आला हज़रत की मोहब्बत डाल दो वरना बड़े होकर अपने मां बाप की कब्र पर जाना भी 😝शिर्क समझेंगे।*

*💓 हैं पुश्त-पनाह ग़ौषे आज़म​* 
*क्युं डरते हो तुम रज़ा किसी से*

*👏 अल्लाह हमे अपने महबूब हुज़ूर सल्लल्लाहों अलैहि वसल्लम के सदक़े तुफैल इल्मे दीन सीखने समझने और अमल करने की तौफ़िक अता करे।*
*▪ امیــــــن ▪*


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